पांव सूखे हुए पत्तों पे अदब से रखना...
धूप में मांगी थी तुमने कभी पनाह इनसे...!!
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बचपन में भरी दुपहरी नाप आते थे पूरा गाँव,
जब से डिग्री-सेंटीग्रेड समझ में आया..... पाँव जलने लगे ।
धूप में मांगी थी तुमने कभी पनाह इनसे...!!
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बचपन में भरी दुपहरी नाप आते थे पूरा गाँव,
जब से डिग्री-सेंटीग्रेड समझ में आया..... पाँव जलने लगे ।